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मानसिक स्वास्थ्य महत्वपूर्ण है: गांधीजी के जीवन के नियम हमें क्या सिखा सकते हैं।

गांधीजी के जीवन के 12 नियम वास्तव में परिवर्तनकारी हैं। यहाँ दर्शाया गया है कि आप उन्हें अपने जीवन में कैसे शामिल कर सकते हैं।

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उन्होंने भारत की स्वतंत्रता में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उनके शब्दों ने आने वाले वर्षों के लिए लोगों के मन में एक अमिट छाप छोड़ी है। उनकी सादगी – धोती और एक गमछा या शाल सभी "स्वदेशी" चीजों के लिए एक अनुस्मारक है। उनके नाम को किसी परिचय की आवश्यकता नहीं है। मोहनदास करमचंद गांधी और ब्रिटिश शासन के खिलाफ उनके अहिंसात्मक अभियान से हमें "सरल जीवन, उच्च विचार" की कला सहित कई सबक सीखने को मिलते हैं। गांधी के जीवन के नियम आज भी वास्तव में परिवर्तनकारी हैं।

उनके दो मूलभूत सिद्धांत हमेशा सत्य और अहिंसा के इर्द-गिर्द घूमते रहे। हम, तव-मित्रम् में, गांधीवादी दर्शन का गहन अध्ययन कर चुके हैं और समझते हैं कि यह कैसे मानसिक स्वास्थ्य से संबंधित है। दैनिक जीवन में इन्हें समझने, अभ्यास करने और अनुकरण करने से व्यक्ति अपनी सोच, भावना और कार्य में एक बड़ा बदलाव ला सकता है। हमारा उद्देश्य भावनाओं को संवारना है, लोगों को मजबूत करना है। और, गांधीजी ने हमें वह रास्ता दिखाया है जो हमें अपनी यात्रा पर ले जाता है।

 

गांधी ने सत्य, अहिंसा, सेवा और स्वराज को अपनी राजनीतिक मान्यताओं के 4 स्तंभों के रूप में इस्तेमाल किया।

यहाँ सत्य अंतिम वास्तविकता और एक नैतिक संहिता एवं आचार नीति का प्रतिनिधित्व करता है।
अहिंसा यहाँ अहिंसात्मक तरीके से असहमति व्यक्त करने के लिए प्रेम की भावना का उपयोग करने की आवश्यकता का प्रतिनिधित्व करती है। उनके लिए प्रेम का यह कार्य अधर्म का विरोध करने का एक शांतिपूर्ण तरीका था।
सेवा की भावना उतनी ही महत्वपूर्ण है जो दया और करुणा को धारण करते हुए समाज में सभी लोगों के प्रति व्यक्ति द्वारा की गयी सेवा का समावेश करती है।

स्वराज स्व-शासन में तब्दील होता है, गांधी का मानना था कि उसका अभ्यास प्रत्येक मानव ने स्वयं को नियंत्रित करने और एक मजबूत समुदाय के निर्माण के साधन के रूप में करना चाहिए।

इसी तर्ज पर, हम दृढ़ता से मानते हैं कि विचारों का  स्व-नियंत्रण एक अत्यधिक जागरूक व्यक्ति का निर्माण करता है। मजबूत समुदाय एक सशक्त राष्ट्र का नेतृत्व करते हैं। तो, मानसिक स्वास्थ्य क्यों महत्वपूर्ण है? अपने जीवन के लिए गांधीजी के 12 नियमों का उपयोग करके मानसिक स्वास्थ्य जागरूकता के बारे में अधिक जानें।

गांधी के जीवन के नियमों को सीखकर मानसिक स्वास्थ्य में सुधार के 12 तरीके

1. परिवर्तन आरंभ करें

"आप खुद वह परिवर्तन बनें जो परिवर्तन आप इस दुनिया में देखना चाहते हैं।"
तो, अक्सर हम अपने बाहरी वातावरण में बदलाव की तलाश करते हैं। हम अपने जीवन में असंतोष देखते हैं जो डिप्रेशन या आशा की कमी की ओर ले जाता है। गांधीजी हमें जो सिखाते हैं, वह है खुद के अंदर एक बदलाव की शुरुआत करना। यह महत्वपूर्ण क्यों है? उदाहरण के लिए, भले ही आपका बाहरी वातावरण बदले,  आप फिर भी उस स्थिति से असंतुष्ट महसूस कर सकते हैं। मान लीजिए कि, आपको अंततः वह काम मिलता है जो आप हमेशा से चाहते थे, लेकिन आप किसी चीज़ को लेकर असंतुष्ट महसूस करते हैं। भीतर एक बदलाव की शुरुआत करने का मतलब है आपके भीतर बिना किसी संघर्ष के हर परिस्थिति के अनुरूप खुदका सबसे अच्छा संस्करण बनना। जो परिवर्तन आप इस दुनिया में देखना चाहते हैं, ख़ुद वह परिवर्तन बन कर वास्तव में आप उन विचारों पर काम करना भी सीखते हैं जो अधिक नुकसान पहुँचाते हैं, आप क्रोध और अन्य नकारात्मक भावनाओं को दूर रखते हैं।टिप: #आप ख़ुद अपने भीतर का बदलाव लाने वाला बनें 

"मैं नहीं मानता कि किसी के आत्म-सम्मान की हानि से अधिक कोई नुकसान है।" - महात्मा गांधी

2. खुद पर विश्वास रखें


क्या आपने रुक कर कभी सोचा है कि क्या वाकई आप अपने जीवन पर नियंत्रण रखते हैं? शायद उन परिस्थिति में नहीं जब आपका फ़ोन नोटिफिकेशन बज रहा होता हो, आपके किचन सिंक में जूठे बर्तन अस्तव्यस्त पड़ें हो, आपके हाथ में किराने की सूची हो, और साथ ही आपको एक ऑनलाइन मीटिंग के लिए तैयार होने की आवश्यकता हो। (ऐसे में आपको कौन संचालित करता हैं?) आप परेशान होकर कोई प्रतिक्रिया दे सकते हैं। या, आप अपने विचारों के प्रति सचेत रह  सकते हैं और यह ध्यान में रख सकते हैं कि आप अपने आस-पास की अराजकता पर कैसे प्रतिक्रिया देते हैं। यह अराजकता आपके मन में है। और, जब आप विचार नियंत्रण पर काम करते हैं, तो आप अपने आस-पास की हर चीज के बारे में जागरूक होने और अपने जीवन में मूल्य जोड़ने वाली प्रतिक्रियाओं को चुनते हुए भावनात्मक रूप से मजबूत होना सीखते हैं। इस मामले में, आप बेहतर मानसिक स्वास्थ्य जागरूकता के लिए प्राथमिकता के अनुसार एक समय में एक समस्या से निपटने के लिए काम करेंगे।

टिप: #अपनी शक्ति को उजागर करें

3. अतीत से बहार निकलिए 

क्षमा करने का कार्य गांधीवादी दर्शन का एक महत्वपूर्ण हिस्सा था। उन्होंने अंग्रेजों से उन्हीं के तरीकों का इस्तेमाल किए बिना लड़ाई लड़ी। उनका मानना था कि मजबूत लोगों में क्षमा करने की शक्ति होती है और उन्होंने उनकी विचार प्रक्रिया को पूरी तरह से मूर्त रूप दिया। मानसिक स्वास्थ्य के मुद्दों के लिए क्षमा क्यों महत्वपूर्ण है? हम सभी के दिलों में पछतावा, शिकायतें, क्रोध या नफरत संग्रहीत है। ये मजबूत डोरियों के रूप में कार्य करते हैं जो हमें हमारे सच्चे ‘स्व’ होने से रोकते हैं। समय के साथ, इनका बोज हमें नीचे खींचता है और हम खुद से नफरत करने लगते हैं। जब आप किसी को माफ करते हैं, तो आप उस व्यक्ति को मुक्त करने के साथ-साथ अपने मन में नकारात्मक भावनाओं से घिरी उस जगह को भी खाली करते हैं। आप व्यक्ति या स्थिति से खुद को पूरी तरह से अलग कर लेते हैं। क्षमा का मतलब यह नहीं है कि आप बार-बार उसी अप्रिय अनुभव को महसूस करें। लेकिन, अब आप मानसिक स्वास्थ्य की जागरूकता के लिए अपनी पसंद का ध्यान रख रहे हैं। 

टिप: #बेहतर जीवन के लिए अपना बोझ कम करें।

4. कृति महत्वपूर्ण है

गांधी के दर्शन ने परिवर्तन को आरंभ करने के एक महत्वपूर्ण भाग के रूप में कृति पर ज़ोर दिया। उदाहरण के लिए, हम ऑनलाइन कई वीडियो का अध्ययन करके अपने स्वस्थ्य के स्तर को बेहतर बनाने की योजना बना सकते हैं। लेकिन, प्रयास का परिणाम तभी दिखाई देगा जब आप उस दिशा में कदम उठाएंगे जो आपके सपनों और आकांक्षाओं का समर्थन करती है। इसलिए, यदि आप स्वस्थ होने का लक्ष्य रखते हैं, तो आपको सबसे पहले क्या करना है? व्यायाम!  ज्ञान को सीखना और जोड़ना अपने जीवन का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है। जो ज्ञान आप सीखते हैं उसे अपने कार्यों के माध्यम से लागू करना अगला कदम है जिस पर गांधीजी ने अपनी शिक्षाओं में जोर दिया जो मानसिक स्वास्थ्य जागरूकता के लिए महत्वपूर्ण हैं। 

टिप: #फ़ौरन कृति करें!

5. सादगी की आवश्यकता

यह एक स्पर्धात्मक दुनिया है। आप देखते हैं कि किसी व्यक्ति ने एक आलिशान कार के साथ अपनी फोटो सोशल नेटवर्किंग साइट पर पोस्ट की है। आप तुरंत वंचित महसूस करते हैं और जल्द ही ऐसी कार खरीदने का मन बना लेते हैं। दुख की बात है कि हम ऐसे समय में रह रहे हैं जहाँ हमें लगातार पैसों के पीछे भागना पड़ता है। हालाँकि, आर्थिक रूप से मजबूत होना महत्वपूर्ण है, मानव के लालच की सीमा कहाँ तक है यह हम सब देख सकते हैं। गांधी के जीवन के 12 नियमों में सरलता का भी उल्लेख है। उन्होंने जीवन में उसीका अभ्यास किया। पृथ्वी पर हमारे पास चाहे जितने भी संसाधन हों, यदि मानवजाती का लोभ अनियंत्रित हो, तो वह हमारे मानवीय आवश्यकताओं के लिए पर्याप्त नहीं होंगे।

टिप: #आवश्यकताओं पर गौर करें, लोभ पर नहीं।

6. सभी के लिए समान स्थान

गांधीजी की अपनी धार्मिक आस्था हिंदू धर्म में होने के बावजूद, उन्होंने सभी धर्मों के लिए सम्मान बनाए रखा। वह सत्य और अहिंसा को सभी धर्मों के मूल तत्व  के रूप में मानते थे। इसी तरह, अगर हम दूसरों की धारणा के प्रति अपने मन में समानता रखते हैं, तो हम पाएँगे कि हम जीवन में उत्कृष्टता प्राप्त कर सकते हैं। हमारा मानसिक अवकाश अब दूसरों के बारे में गलत विचारों और मान्यताओं के साथ भरा नहीं होगा। हम अपनी भावनाओं को बेहतर बनाने के साथ-साथ बेहतर रिश्तों को बनाने की स्थिति में होंगे।

टिप: #समान दुनिया के लिए सबके लिए बराबर का स्थान।

7. यह वर्तमान क्षण है जो मायने रखता है

जैसा कि गांधीजी के पहले सिद्धांत में अपने ख्यालों पर नियंत्रण का उल्लेख है, एक चीज जिस पर आपका नियंत्रण नहीं है वह है भविष्य के परिणाम। भविष्य आनेवाला कल है। चिंताएँ लगातार हो सकती हैं और आपको वर्तमान में रहने से रोक सकती हैं। नकारात्मक विचारों का जुनून या अज्ञात वस्तु का डर आपको कोई कदम उठाने से रोक सकता है। आपकी शक्ति यहाँ इस क्षण में निहित है। एक केंद्रित दिमाग जो इस समय भविष्य की चिंता किए बिना भविष्य के लिए एक सक्रिय योजना देता है, आपको शक्ति प्रदान करता है। हम इस समय पर ध्यान केंद्रित करने के लिए जागृति के अभ्यास पर जोर देते हैं और जीवन की यात्रा का आनंद लेते हैं। जागृति सभी प्रकार के मानसिक स्वास्थ्य मुद्दों के लिए फायदेमंद है।

टिप: #वर्तमान  में जिऐं।

8. आखिर, हम सब इंसान हैं 

जीवन की तेज़ गति में, हम यह बात भूल गये हैं कि हम इंसान हैं। हमने तकनीक की मदद से सब कुछ स्वचालित कर दिया है। हम जितना संभाल सकते हैं उससे अधिक ग्रहण करते हैं। इस प्रकार हमारा मस्तिष्क कई चीजों से भर जाता है और मानसिक स्वास्थ्य की देखभाल करने के लिए समय कम पड़ता है। जब हम अपनी परिपूर्ण दुनिया में गलती करते हैं, तो हम खुद को धोखा देते हैं और आत्म-आलोचनात्मक हो जाते हैं। हम दूसरों से चीजों की उम्मीद करते हैं और साथ ही निराश भी होते हैं। महत्वपूर्ण बात यह है कि हम सभी इंसान हैं। और, जब क्षमा करने की बात आती है, तो अपनी गलतियों के लिए पहले खुद को माफ करना याद रखें। विचारों की स्पष्टता तब होगी जब आप दूसरों से तुलना करना छोड़ देंगे और आप वास्तव में जो हैं उसे स्वीकार करेंगे। 

टिप: #मानवता सबके लिए

9. सातत्य ही कुंजी है

एक व्यक्ति की यात्रा अक्सर दूसरे से भिन्न होती है। फिर भी, जीवन के इस प्रवास के दौरान, हम अपने अध्याय की तुलना किसी अन्य व्यक्ति के विजयी-अध्याय से करते हैं। अगर हम खुद को अपने लक्ष्य से पिछड़ते हुए पाते हैं, तो हम हार मान लेते हैं! कभी-कभी, हम अपने लक्ष्य के करीब होते हैं लेकिन हमें पता नहीं चलता। भारत को स्वतंत्रता की ओर ले जाने के लिए गांधीजी अपने मिशन में बहुत अधिक प्रयासरत थे। प्रतिरोध के बावजूद वह अपने सिद्धांतों का पालन करते रहे। उन्होंने अपनी विचार प्रक्रियाओं के माध्यम से अपनी ताकत को और अपने मानसिक लचीलेपन को साकार किया। अपने मानसिक स्वास्थ्य का निर्माण करने के लिए इसी विचार प्रक्रिया को अपनाने की आवश्यकता है। हमारे प्रयासों में सफलता प्राप्त करने में उम्मीद से थोड़ा अधिक समय लग सकता है। यह मानसिक शक्ति ही है जो आपको जीवन के सबसे अनिश्चित समय से गुजरने में मदद करेगी।

टिप: #बिना डर के बढ़ते रहें

10. दूसरों में अच्छाई देखना

हम सभी में दोष है या सुधार की गुंजाईश हैं। एक व्यक्ति जो लगातार दूसरों की आलोचना करता है, वह खुद से असंतुष्ट होता है। यह बात क्रोध या नफरत के विचारों को भी अपने भीतर जन्म देती है। इसका परिणाम? जब आप दूसरों में अच्छाई नहीं खोज पाते हैं तब मानसिक स्वास्थ्य में गिरावट आती है । इसमें आश्चर्य की बात नहीं कि आप खुद को अकेला पाते हैं जिससे आप व्यक्तिगत और व्यावसायिक रिश्तों को बनाए रखने में मुश्किल का सामना करते हैं। गांधीजी खुद दूसरों की भलाई पर ध्यान देने का विकल्प चुनने में विश्वास रखते थे। उनकी शिक्षाएँ इस बात पर प्रकाश डालती हैं कि जब आप दूसरों में अच्छाई का देखते हैं, तो आप दूसरों की मदद कर सकते हैं। जब मानसिक स्वास्थ्य के मुद्दों की बात आती है, तो हम दूसरों की मदद करने के महत्व को और हमारी भावनात्मक भलाई पर हो रहे अद्भुत प्रभाव को जानते हैं। यह हमारे मन में जकड़ी हुई किसी नफरत या नापसंदगी को मिटाते हुए एक मजबूत मानसिक ढाँचा तैयार करता है।

टिप: #अच्छे बनो, अच्छा देखो

थोड़ा सा अभ्यास एक हजार शब्दों के समतुल्य है। - महात्मा गांधी

11. स्वयं के साथ प्रामाणिक रहना 

यदि आप वही हैं जो आप कहते हैं, और अपने कहे अनुसार कार्य करते हैं, तो आपका जीवन पूर्ण समरसता में होगा। गांधीजी ने हमारे सच्चे ‘स्व’ से जुड़ने के महत्व पर प्रकाश डाला, और कहा कि हमारे विचार हमारी बातों में या हमारे कार्यों के तरीके में दिखाई देने चाहिए। उदाहरण के लिए, आज की दुनिया में, सोशल मीडिया एक ऐसा उदाहरण है जहाँ कोई व्यक्ति ख़ुशी का मुखौटा लगा सकता है और दुनिया को दिखाने के लिए शक्तिशाली विचार साझा कर सकता है। उसके मन की गहराई में कोई आंतरिक अशांति हो सकती है जिसके बारे में किसी ने नहीं सुना है। संवाद में प्रामाणिकता स्वयं और दूसरों के साथ बेहतर रिश्ते बनाती है। अब आप ख़ुद की कोई ऐसी छवि नहीं बनाते हैं जो आपके सच्चे ‘स्व’ से संरेखित न हो। आप जीवन में अच्छा महसूस करते हुए खुद के साथ बेहतर तरीक़े से पेश आ सकते हैं।

टिप: #सच्चे बनें, ‘स्व’ बनें

12. विकास पर ध्यान दें

गांधीजी ने जीवन में निरंतर विकास की अवस्था में रहने की बात कही। इसका मतलब है, कोई व्यक्ति आत्म-विकास के लिए इच्छुक है और खुद को हर बार एक नए लेंस से देखता है। आज के समय में, हम महसूस कर सकते हैं कि हमने जो सफलता प्राप्त की हैं, उसके कारण हम एक आरामदायक स्थिति में हैं। लेकिन, विकास को बनाए रखने की आवश्यकता है, क्योंकि प्रत्येक व्यक्ति को वह कौन है और वह क्या बनना चाहता है इस बात को ध्यान में रखते हुए उत्क्रांत होने की आवश्यकता है। अगर आप फिलहाल किसी एक जगह पर अटके हुए महसूस करते हैं, तो एक छोटा ही सही, कदम उठाएँ। आगे की तरफ बढ़ने वाला यह एक कदम आपकी मानसिक स्वास्थ्य जागरूकता के लिए बहुत अधिक कारगर साबित हो सकता है।

टिप: #बढ़ते रहें

आप हमेशा अपने आप को जीवन के सभी सिद्धांतों का पालन करते नहीं पाओगे। ऐसे दिन होते हैं जब आप स्वयं के साथ किसी तरह का अलगाव महसूस कर सकते हैं। मानसिक स्वास्थ्य जागरूकता पर काम करना एक चरण-दर-चरण प्रक्रिया है। यहाँ सातत्य ही कुंजी है।  हर दिन खुद के लिए खड़े होना है, उपस्थित रहना है और अपने आप में विश्वास रखना है कि आप मायने रखते हैं। अपने जीवन में गांधीजी के 12 नियमों को शामिल करने का प्रयास करें - इसे एक फलक पर लिखें, इसे कागज के एक टुकड़े पर लिख कर पिन करें, इस अनुस्मारक को सेट करने के लिए हर वो चीज़ करें जो आप कर सकते है।

यदि आप अभी भी किसी तरह का अलगाव महसूस करते हैं, तो हमें info@tavamitram.org पर लिखें। हम नि:शुल्क समूह कोचिंग सत्र प्रदान करते हैं और "मेरा मानसिक स्वास्थ्य, मेरी प्राथमिकता" नामक एक नि:शुल्क प्रमाणन भी है, जिसे व्यक्तित्व और मानव व्यवहार को समझने का ज्ञान साझा करने के लिए और कुशल तकनीकों का उपयोग करके आंतरिक संघर्षों से उबरने के तरीक़ों को सीखने के लिए  बनाया गया है। आपको बस निःशुल्क साइन अप करने की आवश्यकता है और आप मानसिक स्वास्थ्य जागरूकता और समस्याओं को सीखने की प्रक्रिया शुरू कर सकते है !

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